जालोर जिले के देसु में वन विभाग को पैंथर ने करवाई परेड, अभी तक वन विभाग की पकड़ से दूर पैंथर

 पिछले 15 दिन से देसु की पहाडियो पर घूमता दिखाई दे रहा पैंथर 



जालोर । कोरोना का कहर खत्म ही नहीं हुआ था की जालौर जिले के देसु गांव में पेंथर में अपना खौफ जमाना शुरू कर दिया । जालौर जिले की ग्राम पंचायत देसु में दशकों पहले देसु की पहाड़ियों में पैंथर बहुतायत मात्रा में पाए जाते थे । देसु की पहाड़ियां सुकडी नदी क्षेत्र एवं आसपास के गांवों की ओरण भूमि पैंथर को सुरक्षित घर प्रदान करती थी जहां शिकार और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित थी अपनी मस्ती के साथ देसु की पहाड़ियों में विचरण करते पैंथर स्वयं को सुरक्षित महसूस कर संपूर्ण पहाड़ी इलाके में विचरण करते थे । परंतु बढ़ती आबादी एवं खनन के पश्चात एवं शिकार की तलाश में अब वन्यजीव शहरों की ओर बढ़ने लगे हैं यही मामला देसू पहाड़ी क्षेत्र से आसपास के गांवों में पैंथर का खौफ दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है । प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले 15 दिनों से पैंथर ने आसपास के लगभग 10 गांवों में अपना खौफ लोगों के मन में बना रखा है करीब 15 दिन पूर्व देसु की पहाड़ियों में दिखे पैंथर को पकड़ने के लिए वन विभाग रेस्क्यू की पूरी टीम मसक्कत कर रही है ।

15 दिन बाद किया नील गाय का शिकार
लॉकडाउन के चलते लोगो के घरों में रहने ओर परिवहन रुकने की वजह से वन्यजीवों ने भोजन की तलाश में गांवो में रुख कर दिया है जिसके फलस्वरूप कल पैंथर ने अपना शिकार बनाया जिससे वहां  के रहने वाले लोगो मे उसका डर और ज्यादा बढ़ गया । प्रारंभिक सूचना में जब पता चला कि पैंथर पहाड़ी में दिखाई दिया है तब संवाददाता द्वारा वहा के ठाकुर आनंद सिंह के बात हुई  जिस पर उन्होंने बताया कि गांव के बाड़े से मवेशि को पहली बार उसने अपना शिकार बनाया जिससे पैंथर के होने की पुख्ता जानकारी प्राप्त हुई । उसके बाद उसे ढूढ़ते  हुए नील गाय का शव प्राप्त हुआ जिसका शिकार किया गया था शिकार करने के तरीके से ज्ञात हुआ की उसका शिकार पैंथर द्वारा किया गया है । उसके बाद   वन विभाग टीम सतर्क हुई तलाश में जुटी है ।

देसु में पैंथर मिलने के बाद ठाकुर आनंद सिंह के विचार
प्रवासियों का आवाजाही का सिलसिला अभी थमा ही नहीं था कि दुसरी तरफ एक और बाशिन्दा कई दशकों बाद अपने पुराने बसेरे एवं अपने पुरखों के घर लोट आया है देसु की पहाड़ियों और देसु के ओरण में पैंथर(लेपर्ड) दिखना हमारे लिए असम्भव‌ बात हो सकती हैं लेकिन जब पैंथर दिखने की बात बुजुर्गों से करों तो कहते हैं ओ कांई चितरों हैं चितरा तो पेळा ता बीस बीस रा टोला देखयोड़ा हैं ओह भाखर तो चितरों रु घर हैं और बुजुर्गों की बात भी सही हैं दशकों पहले देसु की पहाड़ियों में पैंथर्स बहुतायत से पाए जाते थे देसु की पहाड़ियां,सुकड़ी नदी क्षेत्र एवं आसपास के गांवों की ओरण भूमि पैंथर्स को सुरक्षित घर प्रदान करते थीं जहां शिकार और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित थीं अपनी मस्ती के साथ देसु की पहाड़ियों में विचरण करते थे यहां के पैंथर्स के मुरीद तो जोधपुर महाराजा उम्मेदसिंह एवं अंग्रेज़ अफसर भी थे जो कई बार यहां शिकार और दीदार के लिए देसु आते थे देसु की पहाड़ियों में अस्सी साल पहले पैंथर्स का अन्तिम शिकार महाराजा उम्मेदसिंह के द्वितीय पुत्र महाराजकुमार हरिसिंह ने किया था जोधपुर महाराजाओं से जुड़े दन्त कथाओं में कई किस्से हैं। देसु-बोकड़ा में पैंथर्स के साथ-साथ हिरण, चिंकारा, जंगली सूअर, सेह(porcupines), बन्दर, नीलगाय,जरख,नार,सियार,बन बिलाव,मोर, खरगोश आदि वन्य जीव संरक्षण प्राप्त करते थे पर बदलते समय के साथ पानी और भोजन की समस्या के चलते और मानवों द्वारा अंधाधुंध प्रकृति दोहन से हमारे प्रकृति मित्र वन्यजीव विलुप्त हो गए हैं हमने केवल प्रर्यावरण का उपभोग करना हि सिखा है पर्यावरण संरक्षण की तो बात कोसों दुर है आधुनिकता की चकाचौंध में इतने अंधे हो चुके हैं कि इस प्रकृति के दुसरे हकदारों को भुल बैठे प्रकृति पर अपना एक छत्र राज समझ गये जिसके फलस्वरूप प्रर्यावरण संतुलित चक्र नष्ट हो जाने के कारण आज हमें विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा हैं वातावरण इतना प्रदुषित हो चुका हैं कि महानगरों में सांस लेने में दिक्कत हो रही हैं ना जाने प्रतिदिन नई नई बिमारियां लोन्स हो रही है वर्तमान में कोरोनावायरस ने पुरे विश्व में हाहाकार मचा रखा हैं परन्तु भले ही कोरोना लाकडाउन हमारे लिए परेशानी हो सकती हैं पर प्रकृति के लिए वरदान साबित हुआ हैं आसमान इतना साफ हो गया हैं कि जालंधर (पंजाब) से हिमाचल के पहाड़ दिखाई दे रहे हैं,ग्रेटर नोएडा की सड़कों पर नीलगायें गुम रही हैं,गंगा-युमना नदियों का जल साफ हो चुका है, गंगा में डाल्फिंस अठखेलियां करती नजर आ रही हैं, वायु प्रदुषण रुकने से ओजोन परत का छेद पुरी तरह से रिकवर हो चुका हैं लाकडाउन के कारण विलुप्त की कगार पर पहुंच चुके वन्य जीव भी आसानी से दिखाई दे रहे हैं। उसी प्रकार इंसानी और यांत्रिक चहल-पहल थम जाने का फायदा उठाकर पैंथर अपने पुरखों की स्थली एवं अपनी मातृभूमि देसु की पहाड़ियों में लोट आया है  शायद हमारी जनरेशन ने सपने में भी नहीं सोचा था कि हमारे यहां भी पैंथर्स दिखेगा पर यह प्रकृति का ही करिश्मा है आज देसु की पहाड़ियों में विचरण करता हुआ देखा जा सकता हैं परन्तु वर्तमान परिस्थितियां पैंथर्स और मानवों के अनुकूल नहीं है इसलिए वन विभाग को ठा.आनन्दसिंह राठौड़ देसु द्वारा सुचित करने पर पैंथर्स रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा हैं। हमें प्रर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग होना चाहिए ताकि हमारे प्रर्यावरण संतुलित चक्र बना रहे एवं प्रकृति मित्र वन्यजीव विलुप्त होने से बचाये जा सके।


जानकारी मिलने के बाद चार व्यक्तियों को पेंथर को पकड़ने हेतु भेज दिया गया है कोशिश जारी है जल्द ही उसे पकड़ लिया जाएगा अभी तक कोई बड़ी हानि नहीं हुई है अगर ऐसी आशंका होती है तो जोधपुर से टीम बुलवाकर उसे पकड़ लिया जाएगा

अमित चौहान
सहायक वन संरक्षक

भाद्राजून में मिला पैंथर का शव आज तक बना पहेली
कुछ माह पूर्व भाद्राजून थाना अंतर्गत पांचोटा, कंवला, चवरडा, की पहाड़ियों में पैंथर को देखा गया था और उस पैंथर द्वारा मवेशियों का शिकार भी किया गया था परंतु देखने के बाद वन विभाग द्वारा उसको काफी तलाशा गया परंतु वह नहीं मिला एवं कुछ समय बाद वह बाद अर्जुन की पहाड़ियों में मृत पाया गया जिसके मुंह एवं चारों टांगे कटी हुई थी जिस पर मौके पर उपखंड अधिकारी थानाधिकारी वन विभाग की टीम तथा ग्रामीण मौजूद थे पैंथर के पोस्टमार्टम के बाद उसका दाह संस्कार किया गया जिसके बाद वन विभाग की पूरी टीम जांच में जुट गई जिसकी जांच अभी भी विचाराधीन है और अपराधी अभी भी वन विभाग की टीम की पकड़ से काफी दूर ।



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