योगऋषि स्वामी रामदेव से भेंट कर जनजाति गुरुकुलम् उद्घाटन का निमंत्रण

योगऋषि स्वामी रामदेव से भेंट कर जनजाति गुरुकुलम् उद्घाटन का निमंत्रण

तखतगढ़ धाम के नवनिर्मित गुरुकुलम् को मिली स्वीकृति, क्षेत्र में हर्ष की लहर

रिपोर्ट : सोहनसिंह रावणा, तखतगढ़

तखतगढ़। हरिद्वार स्थित पतंजलि योग ग्राम में योगऋषि स्वामी रामदेव से शिष्टमंडल ने सौजन्य भेंट कर तखतगढ़ धाम में नवनिर्मित “जनजाति गुरुकुलम्” के भव्य उद्घाटन समारोह में सादर आमंत्रित किया। इस दौरान गुरुकुलम् की निर्माण प्रगति एवं वर्तमान स्थिति की जानकारी विस्तार से प्रस्तुत की गई।

प्रतिनिधिमंडल ने स्वामी रामदेव को अवगत कराया कि जिस पावन संकल्प का शुभारंभ 27 नवंबर 2022 को भारत माता प्रतिमा एवं जनजाति गुरुकुलम् के भूमि पूजन व शिलान्यास महोत्सव के साथ हुआ था, वह अब पूर्णता की ओर अग्रसर होकर साकार रूप ले चुका है। उल्लेखनीय है कि उक्त अवसर पर स्वामी रामदेव स्वयं तखतगढ़ धाम पधारे थे और अपने करकमलों से आशीर्वाद प्रदान करते हुए इस जनहितकारी एवं सांस्कृतिक अभियान की सराहना की थी।

स्वामी रामदेव ने उस समय जनजातीय समाज के उत्थान, संस्कारयुक्त शिक्षा और भारतीय परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा था कि गुरुकुल शिक्षा पद्धति राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने तखतगढ़ धाम में जनजाति गुरुकुलम् की स्थापना को सामाजिक एवं सांस्कृतिक जागरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया था।

अब जब उन्हें यह जानकारी दी गई कि जनजाति गुरुकुलम् का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है और उद्घाटन के लिए तैयार है, तब उन्होंने स्नेहपूर्वक समारोह में आने की स्वीकृति प्रदान की। उनके आगमन की सूचना मिलते ही तखतगढ़ धाम सहित समूचे क्षेत्र में हर्ष और उत्साह का वातावरण बन गया है।

जनजातीय समाज के लिए शिक्षा का नया केंद्र

तखतगढ़ धाम, जिसे “मारवाड़ का द्वार” कहा जाता है, लंबे समय से धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में यहां जनजाति गुरुकुलम् की स्थापना को जनजातीय समाज के शैक्षिक, नैतिक और सांस्कृतिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

गुरुकुलम् में भारतीय संस्कृति, योग, आयुर्वेद, संस्कारयुक्त शिक्षा तथा आधुनिक विषयों का समन्वित पाठ्यक्रम संचालित करने की योजना है, जिससे विद्यार्थियों को समग्र शिक्षा प्राप्त हो सके। इसका उद्देश्य जनजातीय समाज के बच्चों को संस्कार, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की भावना से ओतप्रोत करना है।

क्षेत्रवासियों में उत्साह

स्वामी रामदेव के संभावित आगमन एवं उद्घाटन समारोह की स्वीकृति से क्षेत्र के श्रद्धालुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं युवाओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं समाजसेवियों का मानना है कि उनके मार्गदर्शन से क्षेत्र में शिक्षा, संस्कार और राष्ट्रभावना को नई दिशा मिलेगी।

गौरतलब है कि तखतगढ़ धाम में प्रस्तावित यह गुरुकुलम् न केवल शिक्षा का केंद्र बनेगा, बल्कि यह सामाजिक एकता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का भी प्रतीक होगा।

उद्घाटन समारोह की तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं तथा आयोजन को भव्य और गरिमामय बनाने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

और नया पुराने

Column Right

Facebook