जालोर के पूर्व विधायक रामलाल मेघवाल का निधन, जनसंघर्ष का एक युग समाप्त

“हार से हौसले तक की कहानी थमी”

जालोर के पूर्व विधायक रामलाल मेघवाल का निधन, जनसंघर्ष का एक युग समाप्त

जालोर (उजीर सिलावट)।
रेवतड़ा की धरती से उठी संघर्ष, धैर्य और जनसेवा की एक जीवंत गाथा आज सदा के लिए मौन हो गई। जालोर विधानसभा से पूर्व विधायक एवं कांग्रेस प्रत्याशी रहे रामलाल मेघवाल का बुधवार सुबह निधन हो गया। वे 80 वर्ष के थे और लंबे समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे।

उनके निधन से न केवल रेवतड़ा और जालोर क्षेत्र, बल्कि राजस्थान की राजनीति ने एक ऐसे जननेता को खो दिया है, जिसने जीवनभर संघर्षों के बीच भी सेवा, संवेदना और आमजन से जुड़े रहने को अपना मूल मंत्र बनाए रखा।

इलाज अहमदाबाद में, गांव में ली अंतिम सांस

परिजनों के अनुसार पूर्व विधायक मेघवाल का उपचार अहमदाबाद में चल रहा था। तबीयत अधिक बिगड़ने पर करीब 15 दिन पूर्व उन्हें जोधपुर ले जाया गया, जहां से चिकित्सकों ने अहमदाबाद रेफर किया। अहमदाबाद में लगभग सात दिन तक उनका इलाज चला।

मंगलवार को उनकी इच्छा के अनुरूप उन्हें उनके पैतृक गांव रेवतड़ा लाया गया, जहां बुधवार सुबह उन्होंने अपने गांव की मिट्टी में ही अंतिम सांस ली।

परिवारजनों ने बताया कि उनकी अंतिम इच्छा थी कि सभी परिजन, रिश्तेदार और शुभचिंतक उन्हें अंतिम दर्शन कर सकें। इसी को ध्यान में रखते हुए गुरुवार को दोपहर 3 बजे रेवतड़ा गांव में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी तथा वहीं उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

संघर्षों से गढ़ा राजनीतिक जीवन

रामलाल मेघवाल का जीवन असाधारण संघर्षों की मिसाल रहा। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में लगभग 18 चुनावों में भाग लिया। सार्वजनिक जीवन की शुरुआत उन्होंने ग्रामसेवक के रूप में की। इसके बाद वे वार्ड पंच, सरपंच और डेलीगेट जैसे पदों पर रहते हुए धीरे-धीरे राजनीति में मजबूत पहचान बनाते चले गए।

उन्होंने जालोर विधानसभा से सात बार चुनाव लड़ा और अंततः वर्ष 2008 में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में विजय हासिल कर विधायक बने, यह कार्यकाल 2013 तक रहा।

लगातार कई चुनावों में पराजय के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। हर असफलता को उन्होंने आत्ममंथन और अनुभव में बदला। वर्षों के संघर्ष, धैर्य और अडिग विश्वास के बाद मिली सफलता ने उन्हें जनमानस में एक जुझारू, सरल और जमीन से जुड़े नेता के रूप में स्थापित किया।

2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था। बाद में उन्होंने वर्ष 2024 में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

व्यक्तिगत पीड़ाओं में भी नहीं डिगा साहस

राजनीतिक संघर्षों के साथ-साथ जीवन ने उन्हें गहरे व्यक्तिगत आघात भी दिए। धर्मपत्नी का असमय निधन, फिर एक सड़क दुर्घटना में पुत्री और दामाद का देहांत तथा अंततः कैंसर जैसी गंभीर बीमारी—इन सभी दुखद घटनाओं के बावजूद उनका मनोबल कभी कमजोर नहीं पड़ा।

उन्होंने अपने दुखों को कठोरता में नहीं बदला, बल्कि उन्हें करुणा और संवेदनशीलता की शक्ति बनाया। जो भी व्यक्ति सहायता की उम्मीद लेकर उनके पास पहुंचा, वह कभी निराश नहीं लौटा। दल, विचारधारा और भेदभाव से ऊपर उठकर उन्होंने हर व्यक्ति को पहले एक मनुष्य के रूप में देखा।

जनसंघर्ष की अमिट विरासत

रामलाल मेघवाल केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि जनसंघर्ष, सेवा और जिजीविषा के जीवंत प्रतीक थे। उनका जीवन यह संदेश देता है कि सच्चा नेतृत्व सत्ता से नहीं, बल्कि पीड़ा के बीच भी मनुष्यता को बचाए रखने से जन्म लेता है।

उनके निधन की खबर मिलते ही जालोर जिले सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। विभिन्न राजनीतिक दलों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

आज वे भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन “हार से हौसले तक” की उनकी यह संघर्षगाथा आने वाली पीढ़ियों को सदैव साहस, धैर्य और जनसेवा की प्रेरणा देती रहेगी।

ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।

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