मांडवला पंचायत में करोड़ों का टेंडर घोटाला !
ग्राम सेवक पर खुद ठेकेदारी कर सरकारी धन हड़पने के गंभीर आरोप
‘मरुधर कंस्ट्रक्शन’ बना पर्दा, अंदर से ग्राम सेवक का खेल? अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में
जालोर/सायला (उजीर सिलावट)। सायला पंचायत समिति की ग्राम पंचायत मांडवला इन दिनों एक बड़े कथित टेंडर घोटाले को लेकर सुर्खियों में है। पंचायत में कार्यरत ग्राम सेवक डॉक्टर कुमार मीणा पर सफाई कार्यों के नाम पर टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं। इस पूरे मामले ने पंचायत प्रशासन की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, पंचायत में सफाई कार्यों के लिए जारी किया गया टेंडर भीनमाल स्थित ‘मरुधर कंस्ट्रक्शन’ के नाम पर दिखाया गया है। हालांकि, आरोप है कि इस फर्म के पीछे वास्तविक नियंत्रण खुद ग्राम सेवक का ही है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह नियमों का खुला उल्लंघन और पद का दुरुपयोग माना जाएगा।
फर्जी फर्म के जरिए भुगतान का खेल?
स्थानीय लोगों का दावा है कि जिस फर्म के नाम पर काम दिखाया गया, उसके वास्तविक संचालक को पंचायत में हो रहे कार्यों की पूरी जानकारी तक नहीं है। इससे संदेह और गहरा हो जाता है कि फर्म केवल एक “कवर” के रूप में इस्तेमाल की गई और अंदर ही अंदर पूरा खेल संचालित किया गया।
दस्तावेजों में विसंगतियां, लाखों का भुगतान सवालों में
मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच में कई तरह की विसंगतियां सामने आने की बात कही जा रही है। लाखों रुपये के भुगतान के रिकॉर्ड पर सवाल उठ रहे हैं, जिससे यह मामला केवल लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित वित्तीय गड़बड़ी का रूप लेता नजर आ रहा है।
जमीनी हकीकत और कागजी काम में भारी अंतर
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में सफाई कार्य केवल कागजों में पूरे दिखाए गए हैं, जबकि हकीकत में हालात जस के तस बने हुए हैं। इससे यह आशंका और मजबूत होती है कि बिना कार्य किए ही भुगतान उठाने की साजिश रची गई।
अधिकारियों की भूमिका भी घेरे में
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इतने बड़े स्तर पर टेंडर और भुगतान बिना उच्च अधिकारियों की जानकारी के संभव है? क्या निगरानी तंत्र पूरी तरह विफल रहा या फिर यह मामला किसी मिलीभगत की ओर इशारा करता है? इन सवालों के जवाब फिलहाल प्रशासन के पास नहीं हैं।
ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश
मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई या जांच शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में भारी रोष है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच नहीं करवाई गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
- पूरे टेंडर और भुगतान की उच्च स्तरीय जांच
- संबंधित दस्तावेजों की ऑडिट और सत्यापन
- दोषी पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई
- पंचायत में हुए कार्यों का फिजिकल वेरिफिकेशन