जोधपुर में जन-आधार घोटाला:
बुजुर्ग महिला का पता बदल पेंशन हड़पी, फर्जी भाई बनकर जुड़ा आरोपी
आधार कार्ड से जुड़ा एक गंभीर फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां 69 वर्षीय बुजुर्ग महिला के रिकॉर्ड में बिना जानकारी बदलाव कर उनकी पेंशन हड़प ली गई। इस पूरे मामले में ई-मित्र संचालक और सत्यापन अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
चौपासनी हाउसिंग बोर्ड निवासी चंद्रकांता पत्नी जीवनराम चौधरी के जन-आधार कार्ड में कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई। उनके बेटे मनोज चौधरी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि एक व्यक्ति ने खुद को महिला का भाई बताकर फर्जी तरीके से परिवार में नाम जुड़वाया और पूरा रिकॉर्ड बदलवा दिया।
जांच में सामने आया कि जन-आधार में महिला का पता बदलकर दौसा जिले के लावां तहसील के जैलमपुरा वनवास गांव का दर्ज कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि महिला कभी उस इलाके में गई ही नहीं।
इतना ही नहीं, आरोपियों ने महिला का बैंक ऑफ बड़ौदा में लिंक खाता हटाकर इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक का नया खाता जोड़ दिया। इसके बाद नवंबर 2025 से हर महीने मिलने वाली 1500 रुपए की वृद्धावस्था पेंशन उसी खाते में ट्रांसफर होने लगी, जिसे आरोपी निकालता रहा।
परिवार को इस गड़बड़ी का पता तब चला जब 28 मार्च को आरजीएचएस योजना के लिए जन-आधार लिंक करवाते समय रिकॉर्ड चेक किया गया।
सबसे बड़ा सवाल जन-आधार की दो स्तरीय सत्यापन प्रक्रिया पर खड़ा हो रहा है। नियमों के अनुसार पहले ग्राम विकास अधिकारी या नगरीय निकाय और फिर उच्च अधिकारी द्वारा वेरिफिकेशन जरूरी होता है, लेकिन पीड़ित पक्ष का आरोप है कि बिना ओटीपी, कॉल या सहमति के ही 7 और 8 अक्टूबर 2025 को पूरा वेरिफिकेशन दिखा दिया गया।
पीड़ित परिवार ने ई-मित्र संचालक, संबंधित अधिकारियों और आरोपी के खिलाफ साजिश, धोखाधड़ी और दस्तावेजों में हेराफेरी के आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई और हड़पी गई पेंशन वापस दिलाने की मांग की है।