जयपुर: गिरफ्तारी के बाद डॉ. सोमदेव बंसल SMS में भर्ती,
प्रोटोकॉल पर उठे सवाल; प्रदेशभर में डॉक्टरों का विरोध
जयपुर में निविक हॉस्पिटल के डॉक्टर डॉ. सोमदेव बंसल की गिरफ्तारी के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि भर्ती प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता
जानकारी के अनुसार, डॉ. बंसल की भर्ती पर्ची पर न तो किसी रेजीडेंट डॉक्टर के हस्ताक्षर हैं और न ही किसी सीनियर डॉक्टर की कंसल्टेंसी ली गई। मेडिकल नियमों के अनुसार, किसी भी मरीज को किस विभाग में भर्ती करना है, इसका निर्णय सीनियर डॉक्टर द्वारा किया जाता है, लेकिन इस मामले में एक रेजीडेंट डॉक्टर ने सीधे जनरल मेडिसिन वार्ड में शिफ्ट कर दिया।
इस पर मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. महेंद्र अग्रवाल ने नाराजगी जताई है और इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताया है।
मेडिकल बोर्ड का गठन
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने मेडिकल-लीगल केस के तहत एक बोर्ड गठित किया है। इसमें कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, जनरल मेडिसिन और फॉरेंसिक मेडिसिन के विशेषज्ञ शामिल हैं। हालांकि 24 घंटे बाद भी सभी जांचें पूरी नहीं हो सकी हैं।
प्रारंभिक जांच में ब्लड टेस्ट, ईसीजी और सीटी स्कैन रिपोर्ट सामान्य आई है। अन्य जांचों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिसके आधार पर आगे निर्णय होगा।
आरोप और गिरफ्तारी का मामला
गौरतलब है कि डॉ. सोमदेव बंसल को 12 अप्रैल को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन पर मरीजों के दस्तावेजों में कथित हेरफेर कर उन्हें RGHS पोर्टल पर अपलोड करने के आरोप हैं। जांच में यह भी सामने आया कि मरीजों को बार-बार डिस्चार्ज और री-एडमिट दिखाया गया तथा कंसेंट फॉर्म में काटछांट की गई।
“अस्पताल बना दूसरा जेल” जैसे आरोप
इस घटना के बाद यह मुद्दा भी फिर उठा है कि प्रभावशाली आरोपी जेल से बचने के लिए बीमारी का हवाला देकर SMS अस्पताल में भर्ती हो जाते हैं। इससे पहले भी एक रिश्वत मामले में आरोपी डॉक्टर कुछ समय के लिए यहां भर्ती रह चुका है।
प्रदेशभर में डॉक्टरों का विरोध
डॉ. बंसल की गिरफ्तारी के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (राजस्थान) के आह्वान पर मंगलवार सुबह 8 बजे से 24 घंटे के लिए निजी अस्पताल बंद रखे गए। इस दौरान ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं प्रभावित रहीं, हालांकि भर्ती मरीजों का इलाज जारी रहा।
पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला सितंबर 2025 में एक महिला मरीज की इलाज के दौरान हुई मौत से जुड़ा है, जिसमें लापरवाही के आरोप लगाए गए थे। पुलिस जांच और RGHS की रिपोर्ट में अस्पताल के खिलाफ अनियमितताएं सामने आने के बाद कार्रवाई की गई।
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