मृत्यु भोज खाना महापाप: ओपाराम मेघवाल
एक आईना भारत /अशोक राजपुरोहित
पाली: लगभग 8 साल पहले हमारे पूरे परिवार ने मृत्यु भोज को त्याग दिया था एंव दृढ़ संकल्प लिया था मृत्यु भोज हमारे परिवार में किसी का नहीं करेंगे ,नही ही मृत्यु भोज खाएंगे जहां पर भी समाज में जाता हूं मृत्यु भोज नहीं करने की सलाह देता हूं समय-समय पर मैं समाज में जाता हूं वहां पर किसी की मृत्यु हो गई हो पर वहां भोज ग्रहण नहीं करता हूँ ये कई सालों से कर रहा हूँ जहां जाता हूँ तो देखता हूँ कि उनके छोटे-छोटे बच्चे है उनकी दशा को देखकर मेरे आंखों में से आंसू आ जाते हैं कि एक तो उनके घर का कमाने वाले चला गया ऊपर से उनके घर में राशन पानी भी नहीं होगा । वह छोटे-छोटे बच्चे इतना बड़ा भोज कैसे कर पाएंगे जब इस बात को हमारे समाज में बड़े बुजुर्गों को मैं अपील करता, निवेदन करता था कि इस मृत्यु भोज को आप हमेशा के लिए बंद करवाएं वह अगर परिवार मैं किसी की मृत्यु हुई है तो हमारा कर्तव्य बनता है उसके परिवार को समाज की तरफ से कुछ सुविधाएं उपलब्ध करवाएं । कई बार हमारी बातों को अनदेखा किया गया लेकिन हमने हार नहीं मानी यह प्रेरणा हमारे गुरुदेव ने दी थी कि मृत्यु भोज करना वह उसका साथ देना दोनों ही परमात्मा के महा अपराधी हैं सरकार के आदेशो का पालन करते हुए सभी से निवेदन करता हूँ कि मृत्यु भोज का त्याग करें और दूसरों को भी मृत्यु भोज मैं भाग नहीं लेने का सलाह दें।
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