स्वतंत्रता दिवस सम्मान सूची में देरी: क्या राजनीतिक दबाव में झुका प्रशासन? विधायक द्वारा अपने चाहतो को सम्मानित करने बना चर्चा का विषय

स्वतंत्रता दिवस सम्मान सूची में देरी: क्या राजनीतिक दबाव में झुका प्रशासन?

विधायक द्वारा अपने चाहतो को सम्मानित करने बना चर्चा का विषय



जालोर (उजीर सिलावट) स्वतंत्रता दिवस 2025 पर जिला स्तरीय समारोह में सम्मानित होने वालों की सूची तय समय पर जारी न होने से प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठ गए हैं। देरी ने न केवल जनता में नाराज़गी बढ़ाई, बल्कि मेरिट बनाम सिफ़ारिश की बहस को भी हवा दे दी है।

देरी से बढ़े संदेह

सूत्रों के अनुसार, सूची जारी करने में हुई देरी के पीछे राजनीतिक हस्तक्षेप, सिफ़ारिशी दबाव या प्रशासनिक सुस्ती कारण हो सकते हैं। चर्चा यह भी रही कि कुछ नेताओं की सिफ़ारिशों के चलते योग्य नाम पीछे रह गए और सिफ़ारिशी नाम आगे बढ़ा दिए गए।

विशेषज्ञों की राय

प्रशासनिक मामलों के जानकारों का कहना है— “जब अधिकारी राजनीतिक दबाव के आगे झुकते हैं, तो मेरिट पीछे छूट जाती है। इससे कार्यप्रणाली में पक्षपात बढ़ता है और कई योग्य लोग सम्मान से वंचित रह जाते हैं।”

स्थानीय नागरिकों के आरोप

स्थानीय नागरिकों का कहना है— “अब मेरिट से ज्यादा जरूरी यह हो गया है कि किसको खुश रखना है।” लोगों के अनुसार यह स्थिति लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और प्रशासनिक साख पर धब्बा है।

सोशल मीडिया पर हलचल

सूची समय पर जारी न होने से शुक्रवार को जिलेभर में हलचल मच गई। सुबह से लेकर देर रात तक यह मुद्दा सोशल मीडिया और शहर के चौक-चौराहों पर चर्चा का केंद्र रहा। लोगों ने सवाल उठाया— “आखिर ऐसी क्या वजह थी, जो सूची समय पर जारी नहीं हो पाई?”

भरोसे पर चोट

स्थानीय सामाजिक संगठनों का कहना है कि सम्मान सूची में मेरिट और समयबद्ध प्रक्रिया की बजाय “किसको खुश रखना है” वाली मानसिकता को प्राथमिकता देना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। ऐसे हालात में योग्य व्यक्तियों के सम्मान की बजाय सिफ़ारिश वालों को प्राथमिकता मिलने का डर बना रहता है।

जनता की मांग: पारदर्शी जवाब

इस पूरे विवाद पर जालोर जिले में गहरा असंतोष है। लोग प्रशासन से पारदर्शी स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन कब और क्या जवाब देता है, क्योंकि हर बीतते दिन के साथ सवाल और भी तेज़ होते जा रहे हैं।

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