राजस्थान अध्ययन में ‘मारवाड़ के रॉबिनहुड’ पदिया मीणा को शामिल करने की मांग तेज

राजस्थान अध्ययन में ‘मारवाड़ के रॉबिनहुड’ पदिया मीणा को शामिल करने की मांग तेज

आदिवासी महासभा जालोर ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

जालोर।
राजस्थान के महान आदिवासी क्रांतिकारी एवं ‘मारवाड़ के रॉबिनहुड’ के नाम से विख्यात पदिया मीणा को राजस्थान अध्ययन के पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग को लेकर आदिवासी महासभा जालोर ने राज्य सरकार से ठोस पहल करने की मांग की है। इस संबंध में महासभा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में बताया गया कि पदिया मीणा का जन्म वर्ष 1836 में जालोर जिले के भाद्राजून गांव में हुआ था। वे 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान मारवाड़ क्षेत्र में अंग्रेजी शासन और सामंती व्यवस्था के खिलाफ सक्रिय रूप से संघर्षरत रहे। उन्होंने आदिवासी समाज को संगठित कर गोरिल्ला युद्ध शैली अपनाई और लंबे समय तक अंग्रेजी सत्ता को चुनौती दी।

महासभा के पदाधिकारियों ने बताया कि पदिया मीणा ने जीवनभर गरीबों, वंचितों और शोषितों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने सामंतों द्वारा किए जा रहे अत्याचारों का विरोध किया और आदिवासी समाज में स्वाभिमान व स्वतंत्रता की चेतना जागृत की। उनके जनहितकारी कार्यों और साहसिक संघर्ष के कारण जनता ने उन्हें सम्मानपूर्वक “मारवाड़ का रॉबिनहुड” की उपाधि दी।

ब्रिटिश हुकूमत ने पदिया मीणा को छलपूर्वक गिरफ्तार कर 5 नवंबर 1887 को 52 वर्ष की आयु में जोधपुर रियासत में फांसी दे दी थी। इसके बावजूद उनका त्याग और बलिदान आज भी आदिवासी समाज के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।

आदिवासी महासभा ने मांग की कि पदिया मीणा को आधिकारिक रूप से आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया जाए और उनका नाम स्वतंत्रता सेनानियों की सूची में जोड़ा जाए। साथ ही उनके जीवन और संघर्ष को राजस्थान अध्ययन के पाठ्यक्रम में विद्यालय, महाविद्यालय एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल किया जाए, ताकि नई पीढ़ी उनके योगदान से परिचित हो सके।

महासभा ने यह भी मांग की कि इतिहासकार सुभाषचंद्र कुशवाह द्वारा लिखित शोधग्रंथ “मारवाड़ के डकैत रॉबिनहुड पदिया मीणा” को राज्य सरकार के सभी सार्वजनिक पुस्तकालयों में उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा उनके जन्मस्थान भाद्राजून में स्मारक एवं पैनोरमा का निर्माण कराया जाए तथा मारवाड़ क्षेत्र के आदिवासी इतिहास पर शोध करने वाले इतिहासकारों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाए।

कोषाध्यक्ष प्रवीण कुमार मीणा ने बताया कि राज्य सरकार यदि इस ऐतिहासिक विषय पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो यह न केवल पदिया मीणा जैसे महान आदिवासी क्रांतिकारी को उचित सम्मान दिलाएगा, बल्कि आदिवासी समाज के इतिहास को भी मुख्यधारा में स्थापित करेगा।

इस अवसर पर सचिव हिम्मताराम, कानतिलाल मीणा, नारायणलाल मीणा सहित अनेक पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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