बाड़मेर में क्रूड ऑयल रिसाव थमा, 20 से अधिक कुएं बंद; कंपनी बोले—ब्लास्ट नहीं, 3.2 तीव्रता का भूकंप था कारण

बाड़मेर में क्रूड ऑयल रिसाव थमा, 20 से अधिक कुएं बंद; कंपनी बोले—ब्लास्ट नहीं, 3.2 तीव्रता का भूकंप था कारण

बाड़मेर।
रेगिस्तानी इलाके बाड़मेर में किसान के खेत से हो रहे क्रूड ऑयल रिसाव की घटना ने पांच दिन तक प्रशासन और कंपनी को सतर्क रखा। शुक्रवार को रिसाव फिलहाल रुक गया है, लेकिन इसके कारणों को लेकर जांच जारी है। एहतियातन केयर्न वेदांता कंपनी ने ऐश्वर्या वेलपेड-8 से जुड़े 20 से अधिक तेल कुओं को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।

कंपनी के अनुसार, इस शटडाउन से प्रतिदिन लगभग 5 हजार बैरल (एक बैरल = 160 लीटर) उत्पादन प्रभावित हुआ है। अब एक-एक पाइपलाइन सेक्शन और सभी संबंधित कुओं की तकनीकी जांच की जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि लीकेज किस स्रोत से हुआ।

ब्लास्ट या भूकंप? कंपनी का दावा

घटना को लेकर ग्रामीणों ने 24 फरवरी की रात ब्लास्ट की आशंका जताई थी। हालांकि कंपनी के मीडिया मैनेजर मुकेश मथराणी ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उस रात 11:25 बजे 3.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की वेबसाइट पर भी इसका रिकॉर्ड उपलब्ध है। भूकंप का केंद्र (एपिसेंटर) तेल क्षेत्र से दूर और लगभग 5 किलोमीटर की गहराई पर था, जबकि इस क्षेत्र में औसतन ड्रिलिंग 2 किलोमीटर तक ही होती है। कंपनी का कहना है कि तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो पाएगा।

किसान की पीड़ा: “50 साल तक खेती नहीं कर पाऊं”

घटना से प्रभावित किसान हरजीराम खोथ ने बताया कि 23 फरवरी को दोपहर करीब 12 बजे उनके खेत से अचानक काला तेल निकलने लगा।

“मुझे कंपनी के सिक्योरिटी गार्ड ने सूचना दी। जब मैं खेत पहुंचा तो 2 से 3 बीघा जमीन पर क्रूड ऑयल फैला हुआ था। बाद में यह फैलाव करीब 4 बीघा तक पहुंच गया,” हरजीराम ने कहा।

उन्होंने बताया कि एक घंटे के भीतर कंपनी के इंजीनियर और अधिकारी मौके पर पहुंचे। तेल के बहाव को रोकने के लिए जेसीबी से गड्ढा खोदा गया, ताकि तेल सड़क तक न फैले। इसके बाद वैक्यूम टैंकरों के जरिए तेल निकासी का काम शुरू हुआ।

पांच दिनों में करीब 60 से अधिक टैंकर क्रूड ऑयल भरकर अन्य स्थानों पर भेजे गए। खेत में फैले तेल पर रेत डालकर उसे ढंकने का प्रयास किया गया, लेकिन किसान का आरोप है कि रेत के बावजूद कई जगहों से तेल बाहर निकलता रहा और जमीन धंसने लगी है।

हरजीराम के अनुसार, उनकी कुल 6 बीघा जमीन है, जिसमें से 4 बीघा सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। “अब पूरी जमीन खेती के लायक नहीं रही। आने वाले कई वर्षों तक यहां फसल उगाना संभव नहीं होगा,” उन्होंने चिंता जताई।

सुरक्षा घेरा और जांच

कंपनी ने प्रभावित क्षेत्र के चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाकर दो सिक्योरिटी गार्ड तैनात कर दिए हैं, ताकि आम लोगों की आवाजाही रोकी जा सके।

जहां से तेल निकल रहा था, वहां करीब 100 मीटर लंबी खाई बनाकर तेल को एक गड्ढे तक मोड़ा गया। इसके बाद वहां से टैंकरों द्वारा लगातार तेल निकाला गया। कंपनी ने दावा किया है कि रिसाव अब नियंत्रित है और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन किया जा रहा है।

उत्पादन और पर्यावरण पर असर

तेल उत्पादन प्रभावित होने के साथ-साथ इस घटना ने पर्यावरण और कृषि भूमि की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने स्वतंत्र जांच और उचित मुआवजे की मांग की है।

फिलहाल तकनीकी टीम विस्तृत निरीक्षण में जुटी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रिसाव का वास्तविक कारण क्या था—प्राकृतिक हलचल या तकनीकी खामी।

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