महाशिवरात्रि पर पांडव कालीन नीलकंठ महादेव मंदिर में भगवान शिव का महाकाल स्वरूप,
उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़, विधायक समाराम गरासिया भी मंदिर पहुंचे
पिंडवाड़ा। उपखंड क्षेत्र के कांटल स्थित पांडव कालीन नीलकंठ महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भगवान भोलेनाथ का भव्य एवं आकर्षक महाकाल स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया। इस दिव्य और अलौकिक श्रृंगार ने मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरे मंदिर परिसर में भक्ति एवं आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। मंदिर के पुजारी विक्रांत ओझा ने विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना कर आकर्षक श्रृंगार किया। पुजारी ओझा क्षेत्र में प्रत्येक पर्व पर भगवान का विशेष एवं अद्भुत श्रृंगार करने के लिए जाने जाते हैं, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह बना रहता है।
विभिन्न समाजों के कुलदेवता के रूप में इसकी विशेष मान्यता
मंदिर के इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए पुजारी ने बताया कि नीलकंठ महादेव मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है और विभिन्न समाजों के कुलदेवता के रूप में इसकी विशेष मान्यता है। यह मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां दूर-दराज के गांवों सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु नियमित रूप से दर्शन के लिए पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर रविवार सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयकारों से मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की। दिनभर दर्शन और पूजा-अर्चना का क्रम चलता रहा, जबकि रात्रि में विशेष भजन संध्या एवं महाआरती का आयोजन प्रस्तावित है।
विधायक समाराम गरासिया भी मंदिर पहुंचे
इस अवसर पर विधायक समाराम गरासिया भी मंदिर पहुंचे और भगवान शिव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। उन्होंने क्षेत्र की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। हाल ही में बजट घोषणा में कांटल से रानेला फली तक पक्की सड़क निर्माण की स्वीकृति मिलने पर ग्रामीणों ने विधायक गरासिया का माला एवं साफा पहनाकर स्वागत और अभिनंदन किया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति एवं ग्रामीणों द्वारा समुचित व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का वातावरण बना रहा।