जसोल में भव्य महंत पद महोत्सव:
गणेशपुरी महाराज बने नर्बदेश्वर महादेव मंदिर के नए महंत
जसोल की पावन तपोभूमि स्थित प्राचीन एवं सिद्धपीठ श्री नर्बदेश्वर महादेव मंदिर में रविवार को भव्य महंत पद महोत्सव का आयोजन श्रद्धा, परंपरा और वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। परम पूज्य श्री संध्यापुरी जी महाराज के ब्रह्मलीन होने के पश्चात परंपरा अनुसार पूज्य गणेशपुरी जी महाराज को मंदिर का नया महंत बनाया गया।
समारोह के मुख्य आकर्षण के रूप में रावल मल्लीनाथ जी के वंशज एवं 25वें गादीपति रावल किशन सिंह जसोल ने गणेशपुरी जी महाराज का तिलक कर उन्हें चादर ओढ़ाकर विधिवत महंत पद की गादी पर विराजमान कराया। इस दौरान “हर-हर महादेव” और “जय श्री नर्बदेश्वर भगवान” के जयघोषों से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।
संत-महात्माओं की मौजूदगी में गरिमामय आयोजन
कार्यक्रम में नारायण गिरी जी महाराज, शंभूवन जी महाराज और बालकवन जी महाराज सहित अनेक संत-महात्माओं का सान्निध्य रहा। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक परंपराओं के बीच महंत पद की रस्में पूरी की गईं। जसोल और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य नागरिक आयोजन के साक्षी बने।
लोक संस्कृति की रंगत ने बढ़ाई शोभा
धार्मिक आयोजन के साथ-साथ लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। घुड़ नृत्य, गैर नृत्य और पुष्कर से आए प्रसिद्ध नगारची कलाकारों की प्रस्तुतियों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया। स्थानीय दमामी कलाकारों ने भी अपनी कला से श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
संतों ने दिया सेवा, परंपरा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
अपने आशीर्वचन में नारायण गिरी जी महाराज ने संत परंपरा को भारतीय संस्कृति की आत्मा बताते हुए जल, वन और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर दिया। संत समाज ने सेवा और समर्पण को धर्म का मूल बताते हुए समाज को एकजुट रहने का संदेश दिया।
आध्यात्मिकता के साथ विकास पर जोर
रावल किशन सिंह जसोल ने कहा कि नर्बदेश्वर महादेव मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि एक जीवंत आध्यात्मिक धरोहर है। उन्होंने ओरन, तालाब, बावड़ियों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताया। साथ ही गौसंरक्षण और पशुधन विकास को भी आवश्यक बताया।
युवाओं से जुड़ने का आह्वान
कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने युवाओं से धर्म, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने जल संरक्षण, वृक्षारोपण और पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन को समय की जरूरत बताया।
महंत गणेशपुरी जी महाराज का संदेश
महंत पद ग्रहण करने के बाद गणेशपुरी जी महाराज ने सेवा और साधना को जीवन का मूल बताते हुए कहा कि वे कर्म में विश्वास रखते हैं। उन्होंने युवाओं को सही दिशा में आगे बढ़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया।
पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था, लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने जसोल क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा और उत्साह से सराबोर कर दिया।