हाईकोर्ट का बड़ा फैसला:
पूरे बैंक खाते फ्रीज करना गलत, सिर्फ विवादित रकम तक ही रोक संभव
फिल्म निर्माता श्वेतांबरी विक्रम भट्ट और विक्रम भट्ट से जुड़े बैंक खातों को फ्रीज करने के मामले में हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी व्यक्ति के पूरे बैंक खाते को ब्लॉक करना अनुचित है—रोक केवल विवादित राशि तक ही सीमित होनी चाहिए।
क्या कहा कोर्ट ने?
जस्टिस फरजंद अली की अदालत ने माना कि जांच एजेंसियां बिना ठोस आधार के पूरे खाते फ्रीज नहीं कर सकतीं। यह कदम “असाधारण” है और बेहद सावधानी से ही उठाया जाना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि:
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खाते और कथित अपराध के बीच सीधा संबंध होना जरूरी है
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बिना उचित कारण के फ्रीजिंग, मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है
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बैंक खाता आज के समय में व्यक्ति के आर्थिक जीवन का अहम आधार है
क्या है मामला?
मामला उदयपुर में दर्ज एक धोखाधड़ी केस से जुड़ा है। शिकायतकर्ता डॉ. अजय मुरडिया ने आरोप लगाया कि फिल्म निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपए निवेश करवाए गए, लेकिन तय प्रोजेक्ट पूरे नहीं हुए।
आरोपों के अनुसार:
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कुल बजट लगभग 40 करोड़ तय हुआ था
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बाद में रकम बढ़ाकर 47 करोड़ कर दी गई
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करीब 44 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया
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आरोप है कि लगभग 30 करोड़ रुपए का गबन हुआ
खातों के फ्रीज होने से क्या हुआ?
जांच के दौरान पुलिस निर्देश पर बैंक खातों को पूरी तरह फ्रीज कर दिया गया था, जिससे:
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घरेलू खर्च रुक गए
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कर्मचारियों का वेतन अटक गया
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लोन और व्यापारिक भुगतान प्रभावित हुए
कोर्ट ने निर्देश दिया कि:
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केवल 30 करोड़ रुपए (विवादित राशि) तक ही डेबिट रोक लागू रहे
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बाकी रकम पर सामान्य लेन-देन जारी रहे
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संबंधित बैंकों को खातों को तुरंत डी-फ्रीज करने के आदेश दिए गए
क्यों अहम है फैसला?
यह फैसला स्पष्ट करता है कि:
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जांच के नाम पर अंधाधुंध कार्रवाई नहीं हो सकती
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आर्थिक गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाना व्यक्ति के अधिकारों के खिलाफ है
यह आदेश भविष्य में ऐसे मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।