सुरेश्वर महादेव मंदिर में तीन दिवसीय महोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब, हजारों श्रद्धालु हुए शामिल

 ऐसराणा पर्वत गूंजा “हर-हर महादेव” के जयकारों से

सुरेश्वर महादेव मंदिर में तीन दिवसीय महोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब, हजारों श्रद्धालु हुए शामिल



आहोर (जालोर)। आहोर क्षेत्र के निकट पांडगरा गांव स्थित ऐसराणा पर्वत की पावन वादियों में बसे प्राचीन आस्था केंद्र श्री सुरेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय भव्य धार्मिक महोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। परम सिद्ध योगीराज मठ संस्थापक महंत फतेहगिरिजी महाराज की 617वीं जयंती, ब्रह्मलीन महंत पर्बतगिरी महाराज की मूर्ति स्थापना और महंत चेतनगिरिजी महाराज की समाधि जीर्णोद्वार के उपलक्ष्य में आयोजित इस महोत्सव में क्षेत्र सहित दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। तीन दिनों तक ऐसराणा पर्वत की वादियों में भक्ति, वैदिक मंत्रोच्चार और भजनों की गूंज सुनाई देती रही।

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भव्य शोभायात्रा से हुआ शुभारंभ

महोत्सव के प्रथम दिन पांडगरा गांव से भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो विभिन्न मार्गों से होते हुए सुरेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण पहुंची। शोभायात्रा में साधु-संतों सहित सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों की गूंज, जयकारों और भजनों के बीच श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ यात्रा में शामिल हुए। यात्रा के दौरान पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में सराबोर नजर आया।

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अघोरी पार्टी और झांकियां बनी आकर्षण

शोभायात्रा में पंजाब से आए ऑर्केस्ट्रा दल ने अपनी प्रस्तुति से माहौल को उत्साहपूर्ण बना दिया। वहीं दिल्ली से आई अघोरी पार्टी ने अपने अनोखे नृत्य और करतबों से लोगों को आकर्षित किया। ऊंट और घोड़ों की सवारी के साथ कई आकर्षक झांकियां भी शोभायात्रा का हिस्सा रहीं। ढोल की थाप पर युवा-युवतियां नृत्य करते नजर आए, जबकि महिलाएं भजन-कीर्तन गाते हुए यात्रा में शामिल हुईं।



वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ विशाल यज्ञ

महोत्सव के दूसरे दिन मंदिर परिसर में विशाल वैदिक यज्ञ का आयोजन हुआ। यज्ञाचार्य भरत भंवरलाल ओझा और प्रवीण लीलाधर ओझा सहित विद्वान पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ संपन्न कराया। शंखध्वनि और मंत्रों की गूंज के बीच यजमान परिवारों ने श्रद्धा के साथ अग्नि में आहुतियां अर्पित कीं।

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भजन संध्या में भक्ति का रंग

महोत्सव के दौरान आयोजित भजन संध्या में प्रसिद्ध कलाकारों ने भक्ति रस की वर्षा कर दी। प्रथम रात्रि को बालोतरा के भजन गायक शिवपुरी ने गणपति वंदना और गुरु वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति दी। वहीं दिल्ली एंड पार्टी के कलाकारों ने देवी-देवताओं की वेशभूषा में आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियां दीं।



छोटू सिंह रावणा के भजनों पर झूमे भक्त

दूसरी रात्रि को राजस्थान के प्रसिद्ध भजन गायक छोटू सिंह रावणा ने गुरु वंदना के साथ भजनों की प्रस्तुति दी। उन्होंने “म्हारो सेठ रखालो” और “आबुराज पधारो” सहित कई लोकप्रिय भजनों से श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। भजन संध्या के दौरान हजारों श्रद्धालु पांडाल और मंदिर परिसर में मौजूद रहे।



संत-महात्माओं का मिला सानिध्य

महोत्सव में देशभर से आए संत-महात्माओं का सानिध्य प्राप्त हुआ। इनमें जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती महाराज, महंत नारायणगिरी महाराज, महंत महेंद्रानंदगिरी महाराज, महंत रणछोड़ भारती महाराज, महंत पीर योगी गंगानाथ महाराज, महंत शंकर स्वरूप ब्रह्मचारी महाराज, महंत महेंद्र भारती महाराज, महंत जबर भारती महाराज, महंत जगदीश भारती महाराज, महंत शंकरगिरी महाराज, महंत हरिगिरी महाराज, महंत दिवेंद्र भारती, महंत संतोषपुरी महाराज, महंत डूंगरगिरी महाराज, महंत शेरगिरी महाराज, महंत केवलगिरी महाराज, महंत सुखदेव पुरी महाराज, महंत मदन भारती महाराज तथा साध्वी उमा भारती शामिल रहे।

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महावीर गिरिजी महाराज का हुआ सम्मान

कार्यक्रम के दौरान मठाधीश श्री श्री 1008 महावीर गिरिजी महाराज का माला और शॉल ओढ़ाकर भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान पांडाल में महादेव जी, पर्बत गिरिजी, फतेहगिरिजी महाराज और चेतन गिरिजी महाराज के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।



अंतिम दिन मूर्ति स्थापना व महाप्रसादी

महोत्सव के अंतिम दिन सोमवार को ब्रह्मलीन महंत पर्बत गिरिजी महाराज और महंत चेतनगिरिजी महाराज की मूर्ति स्थापना वैदिक मंत्रोच्चार और ढोल-नगाड़ों के बीच संपन्न हुई। इसके बाद उत्तर पूजा, दादा फतेहगिरिजी परिवार का बहुमान और विशाल महाप्रसादी का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।



आकर्षक रोशनी से सजा मंदिर परिसर

तीनों दिनों तक सुरेश्वर महादेव मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी और सजावट से सुसज्जित किया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, प्रसाद और बैठने की विशेष व्यवस्था की गई। आयोजन समिति ने बताया कि पूरे आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का विशेष सहयोग रहा।

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