मां बनी न्याय की आवाज, बेटे को 10 साल की सजा
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जोधपुर-की पॉक्सो कोर्ट ने पारिवारिक रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक गंभीर मामले में आरोपी बेटे को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले की सबसे खास बात यह रही कि खुद आरोपी की मां ने उसके खिलाफ कोर्ट में गवाही दी, जो केस का निर्णायक मोड़ साबित हुई।
करीब 5 साल पुराने इस मामले में कोर्ट ने आरोपी को सगे भाई की पत्नी के साथ रेप और दूसरी भाभी के साथ रेप की कोशिश का दोषी पाया। कोर्ट ने आरोपी पर कुल 85 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला 6 अप्रैल को जज डॉ. दुष्यंत दत्त ने सुनाया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
अपने 54 पन्नों के फैसले में कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसे अपराध समाज की नैतिकता को तोड़ते हैं और यदि इन्हें कड़ी सजा नहीं दी गई तो समाज में अराजकता फैल सकती है। फैसले में ‘श्रीरामचरितमानस’, ‘मनुस्मृति’ और ‘बृहस्पति-स्मृति’ के श्लोकों का उल्लेख करते हुए दंड के महत्व को रेखांकित किया गया।
घटना का पूरा घटनाक्रम
पीड़ित पक्ष के अनुसार, 10 मार्च 2021 को पहली महिला खेत में गई थी, जहां आरोपी जेठ ने उसके साथ दुष्कर्म किया। रिश्ते और सामाजिक बदनामी के डर से उसने यह बात छुपा ली।
इस चुप्पी का फायदा उठाते हुए आरोपी ने 4 जुलाई 2021 की रात दूसरी भाभी के साथ भी रेप की कोशिश की। वह अपनी सास के पास सो रही थी, तभी आरोपी वहां पहुंचा। महिला के शोर मचाने पर उसकी सास ने हस्तक्षेप किया, जिससे आरोपी भाग निकला।
इसके बाद 6 जुलाई 2021 को पीपाड़ शहर थाने में मामला दर्ज कराया गया।
मां की गवाही बनी सबसे मजबूत सबूत
मामले में सबसे अहम गवाह आरोपी की मां रही। कोर्ट में उसने अपने बेटे के खिलाफ सच्चाई बताते हुए कहा कि वह शराबी और आदतन अपराधी है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब एक मां अपने पुत्रमोह से ऊपर उठकर न्याय का साथ देती है, तो यह समाज के लिए एक बड़ा संदेश है।
कोर्ट का फैसला
कोर्ट ने आरोपी को विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई—
- धारा 376(2) के तहत 10 साल का कठोर कारावास व 50,000 रुपए जुर्माना
- धारा 354 के तहत 3 साल का कठोर कारावास व 10,000 रुपए जुर्माना
- धारा 376/511 (रेप का प्रयास) के तहत 5 साल का कठोर कारावास व 25,000 रुपए जुर्माना
सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। साथ ही कोर्ट ने दोनों पीड़िताओं को मुआवजा दिलाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिए हैं।
यह फैसला न सिर्फ अपराध के खिलाफ कड़ी चेतावनी है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सच और न्याय के सामने रिश्ते भी छोटे पड़ जाते हैं