जयपुर में PHED ठेकेदारों का उग्र प्रदर्शन, भुगतान नहीं मिला तो पानी सप्लाई रोकने की चेतावनी

 जयपुर में PHED ठेकेदारों का उग्र प्रदर्शन,

 भुगतान नहीं मिला तो पानी सप्लाई रोकने की चेतावनी


जयपुर। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के ठेकेदारों का बकाया भुगतान को लेकर विरोध अब उग्र होता जा रहा है। राजधानी जयपुर स्थित जलदाय भवन के बाहर पिछले 5 दिनों से चल रहे धरने में प्रदेशभर से आए ठेकेदारों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

ठेकेदारों का कहना है कि पिछले करीब 33 महीनों से 3500 करोड़ रुपए का भुगतान अटका हुआ है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह डगमगा गई है। राजस्थान कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहे इस प्रदर्शन में अब संबंधित उद्योगों के लोग भी समर्थन में उतर आए हैं।

20 अप्रैल तक का अल्टीमेटम

प्रदर्शनकारियों ने सरकार को 20 अप्रैल तक का समय दिया है। चेतावनी दी है कि यदि तय समय में भुगतान नहीं हुआ तो 21 अप्रैल से पूरे प्रदेश में रोजाना 2 घंटे पानी की सप्लाई बंद कर दी जाएगी। इससे आम जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।




कर्ज में डूबे ठेकेदार, प्रोजेक्ट ठप

ठेकेदारों के अनुसार राज्य में करीब 3000 PHED कॉन्ट्रैक्टर काम कर रहे हैं, जिनका भुगतान लंबे समय से रुका हुआ है। जल जीवन मिशन और अमृत योजना के तहत किए गए कार्यों का पैसा नहीं मिलने से कई प्रोजेक्ट बंद हो चुके हैं, जबकि कई बंद होने की कगार पर हैं। ठेकेदार अपने कर्मचारियों को वेतन तक नहीं दे पा रहे हैं और कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है।

आत्मदाह की चेतावनी, हालात गंभीर

प्रदर्शन में शामिल ठेकेदारों ने कहा कि हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कुछ लोग आत्मदाह या आत्महत्या जैसे कदम उठाने की बात कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि यदि ऐसी स्थिति बनती है तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

उद्योगों पर भी असर

भुगतान अटकने से पाइप और प्लास्टिक इंडस्ट्री भी प्रभावित हो रही है। इस क्षेत्र में करीब 1000 करोड़ रुपए फंसे हुए हैं, जिससे उत्पादन और सप्लाई चेन पर असर पड़ा है।

5 लाख रोजगार पर संकट

ठेकेदारों का दावा है कि इस पूरे संकट का असर करीब 5 लाख लोगों के रोजगार पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार 15 दिन में भुगतान होना चाहिए, लेकिन 33 महीने बाद भी भुगतान नहीं हुआ है।

ठेकेदारों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिससे प्रदेश में जल आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।

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