थ्री-डिजिट नंबर घोटाला
बिना जांच RC रद्द नहीं कर सकता विभाग, हाईकोर्ट से वाहन मालिकों को बड़ी राहत
जोधपुर-राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने बहुचर्चित ‘थ्री-डिजिट नंबर घोटाले’ में अहम फैसला सुनाते हुए वाहन मालिकों को राहत दी है। अदालत ने साफ कहा कि बिना उचित जांच और ‘कारण बताओ नोटिस’ दिए परिवहन विभाग किसी भी वाहन की आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) को न तो निलंबित कर सकता है और न ही रद्द।
जस्टिस कुलदीप माथुर की एकल पीठ ने परिवहन विभाग द्वारा जारी आरसी निलंबन/रद्दीकरण के नोटिसों को याचिकाकर्ता के मामले में निरस्त कर दिया। यह याचिका जोधपुर के मगरा पुंजला स्थित राजस्थान एजुकेशन ट्रस्ट के ट्रस्टी अतुल सांखला की ओर से दायर की गई थी।
कोर्ट ने तय की प्रक्रिया
सुनवाई के बाद कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा—
- 4 हफ्ते में जवाब जरूरी: वाहन मालिक को चार सप्ताह के भीतर संबंधित प्राधिकरण के सामने वाहन की खरीद और रजिस्ट्रेशन से जुड़ा पूरा विवरण पेश करना होगा।
- विभाग करेगा जांच: रिप्रेजेंटेशन मिलने के बाद परिवहन विभाग रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों से तथ्य जांचेगा।
- पहले नोटिस, फिर कार्रवाई: यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो सीधे कार्रवाई नहीं होगी—पहले ‘कारण बताओ नोटिस’ देना अनिवार्य होगा।
- तब तक RC रहेगी वैध: अंतिम निर्णय तक वाहन की आरसी बहाल रहेगी और कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
- वाहन बेचने पर रोक: जांच पूरी होने तक संबंधित वाहन को किसी तीसरे पक्ष को बेचा या ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा।
आपराधिक जांच जारी रहेगी
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश का असर घोटाले से जुड़ी आपराधिक जांच पर नहीं पड़ेगा। पुलिस और जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई स्वतंत्र रूप से जारी रखेंगी।
क्या है ‘थ्री-डिजिट नंबर’ घोटाला?
दरअसल, 001 से 999 तक के वीआईपी नंबर आमतौर पर ई-नीलामी के जरिए आवंटित किए जाते हैं। लेकिन आरोप है कि विभाग के कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों और दलालों ने मिलीभगत कर सिस्टम में हेरफेर कर इन नंबरों को बिना नीलामी के आवंटित कर दिया। इससे सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
घोटाले के खुलासे के बाद परिवहन विभाग ने ऐसे वाहनों की आरसी रद्द/निलंबित करने और संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई शुरू की थी, जिसे अब हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी