सुगालिया बालोतान के किसानों की चीख 8 माह से ध्वस्त जवाई नहर पुलिया, 7 शिकायतें कीं… प्रशासन सिर्फ बहाने गढ़ता रहा!

सुगालिया बालोतान के किसानों की चीख

 8 माह से ध्वस्त जवाई नहर पुलिया, 7 शिकायतें कीं… प्रशासन सिर्फ बहाने गढ़ता रहा!




जालोर/आहोर। आहोर तहसील के सुगालिया बालोतान गांव के किसान पिछले 8 महीनों से टूटी पुलिया की मार झेल रहे हैं। जवाई नहर पर बनी यह पुलिया किसानों के खेतों तक पहुंचने का मुख्य रास्ता है, लेकिन ध्वस्त होने के बाद से किसान रोज़ाना 4 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाने को मजबूर हैं।



 किसानों की रोज़मर्रा की जंग

ग्रामीणों का कहना है कि बिठिया वितरिका के माइनर संख्या 68900 राइट व 71700 राइट के बीच यह पुलिया ही खेतों का रास्ता है। पुलिया ध्वस्त होने से किसान न सिर्फ समय और मेहनत गवां रहे हैं, बल्कि रोज़ाना अतिरिक्त खर्च का बोझ भी झेल रहे हैं। कई बार दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।

सात शिकायतें… तीन बार पत्र लौटाए गए

ग्रामवासियों का दर्द और बढ़ गया जब उन्होंने बताया कि अब तक इस मुद्दे पर 7 लिखित शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं। इनमें से 3 पत्र विभाग ने "बजट के अभाव" या अन्य बहाने बनाकर लौटा दिए। किसानों ने स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और विधायक को कई बार मौखिक सूचना भी दी, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन और फाइलों में खेल होता रहा।




 किसानों का सवाल – "कब तक बजट का बहाना?"

गांव वालों का सीधा सवाल है – "आखिर प्रशासन कब तक बजट का बहाना बनाता रहेगा? क्या किसानों की जान, समय और मेहनत की कोई कीमत नहीं?
"7 बार लिखित शिकायत और बार-बार मौखिक सूचना देने के बाद भी कार्रवाई नहीं होना प्रशासन की घोर लापरवाही नहीं तो और क्या है?"



 जनप्रतिनिधियों पर भी सवाल

ग्रामवासियों ने कहा कि चुनाव आते ही नेता वोट मांगने खेत-खेत दौड़ते हैं, लेकिन असली समस्या पर सब खामोश हैं। क्या किसानों की समस्याएं केवल भाषणों और चुनावी वादों तक सीमित हैं? गांव वालों ने अब शासन सचिव, जयपुर को पत्र भेजकर चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो किसान आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि अब वे कागजों के खेल और बजट बहाने से थक चुके हैं।
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