दो साल से जर्जर भवन में चल रहा सरकारी स्कूल, खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर 37 बच्चे

दो साल से जर्जर भवन में चल रहा सरकारी स्कूल, खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर 37 बच्चे

प्रिंसिपल ने विभाग को दी सूचना, DEO बोले– नहीं है जानकारी

जालोर/सायला।
जिले के सायला उपखंड क्षेत्र के बावतरा गांव की जबड़ नाड़ी स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय पिछले करीब दो वर्षों से जर्जर भवन में संचालित हो रहा है। भवन की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बच्चों को कक्षाओं के बजाय खुले मैदान और पेड़ों की छांव में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है।

विद्यालय की प्रिंसिपल अरुणा कुमारी ने बताया कि स्कूल भवन की दीवारों और छत में कई जगह गहरी दरारें पड़ चुकी हैं। प्लास्टर झड़ रहा है और संरचना कमजोर हो गई है। ऐसे में बच्चों को कमरों में बैठाना जोखिम भरा है। वर्तमान में स्कूल में 37 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जिन्हें अस्थायी रूप से खुले स्थान पर पढ़ाया जा रहा है।

विभाग और जनप्रतिनिधियों को दी गई सूचना

प्रिंसिपल के अनुसार, विद्यालय की जर्जर स्थिति की जानकारी स्थानीय प्रशासन, शिक्षा विभाग के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कई बार दी जा चुकी है। ग्रामीणों ने भी लिखित रूप से समस्या से अवगत कराया है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया।

उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से छत की आंशिक मरम्मत का कार्य शुरू किया गया है, मगर भवन की चारदीवारी और कक्षाओं की दीवारें भी जर्जर हैं। परिसर में बनी पानी की टंकी भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिससे विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।

हालिया हादसे के बाद बढ़ी आशंका

20 फरवरी को जालोर जिले के ही बावतरा गांव में एक निजी विद्यालय की दीवार गिरने से 6 वर्षीय छात्रा की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है। अभिभावकों ने बच्चों को जर्जर भवन में बैठाने का विरोध किया, जिसके चलते शिक्षकों को खुले में पढ़ाई करवानी पड़ रही है।

शिक्षकों का कहना है कि तेज धूप, सर्दी या बारिश के मौसम में खुले में पढ़ाई कराना मुश्किल हो जाता है, जिससे शिक्षण कार्य भी प्रभावित हो रहा है।

DEO बोले – जानकारी नहीं, जांच कराएंगे

इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी भंवरलाल ने कहा कि उन्हें इस विद्यालय की जर्जर स्थिति की जानकारी नहीं है। यदि कोई विद्यालय असुरक्षित स्थिति में है तो उसकी जांच करवाई जाएगी और आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि जिले में जिन स्कूल भवनों को मरम्मत या पुनर्निर्माण की आवश्यकता है, उनके प्रस्ताव आपदा प्रबंधन मद से भेजे गए हैं। मार्च तक आवश्यक कार्य पूर्ण कराने का प्रयास किया जाएगा। जो भवन उपयोग योग्य नहीं हैं, उन्हें बंद कर वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

सवालों के घेरे में व्यवस्था

एक ओर विभाग को जानकारी न होने का दावा किया जा रहा है, वहीं विद्यालय प्रशासन का कहना है कि कई बार सूचना दी जा चुकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जिम्मेदारी किसकी है?

दो वर्षों से जर्जर भवन में पढ़ रहे मासूम बच्चों की सुरक्षा को लेकर अब ग्रामीणों और अभिभावकों ने शीघ्र समाधान की मांग की है। समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।

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