जालोर में माली पोलजी की लोक विरासत का
भव्य उत्सव, गैर नृत्य और भजनों से गूंजा पोलजी नगर
जालोर-में लोक कला और परंपरा की अनूठी झलक उस समय देखने को मिली, जब प्रसिद्ध लोक कलाकार माली पोलजी का 51वां वार्षिकोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। रेलवे स्टेशन के पास स्थित पोलजी नगर में आयोजित इस आयोजन में दिनभर धार्मिक अनुष्ठान और रातभर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का दौर चला।
कार्यक्रम की शुरुआत पूजा-पाठ से हुई, जिसके बाद गैर नृत्य महोत्सव का आयोजन किया गया। माली पोलजी की परंपरा को आगे बढ़ा रहे उनके परिजनों और स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक गैर नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रंग-बिरंगी वेशभूषा और लोक धुनों पर थिरकते कलाकारों ने माहौल को पूरी तरह उत्सवमय बना दिया।
रात्रि में भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों ने भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। मधुर संगीत और लोक धुनों पर श्रोता देर रात तक झूमते नजर आए। पूरा क्षेत्र भक्ति और संस्कृति के रंग में सराबोर रहा।
इतिहास के अनुसार, माली पोलजी की कला से प्रभावित होकर जोधपुर के महाराजा ने उन्हें जालोर में करीब 200 बीघा भूमि प्रदान की थी। इस भूमि का एक बड़ा हिस्सा उन्होंने शिक्षा के लिए दान कर दिया, जहां आज शिक्षण संस्थान संचालित हो रहे हैं, जबकि शेष क्षेत्र पोलजी नगर के रूप में विकसित हुआ।
माली पोलजी की ख्याति देशभर में रही। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी कला का प्रदर्शन किया और सम्मान प्राप्त किया। उनकी यही समृद्ध विरासत आज भी उनका परिवार और स्थानीय कलाकार आगे बढ़ा रहे हैं।
हर वर्ष आयोजित होने वाला यह उत्सव न केवल लोक संस्कृति को जीवित रखने का माध्यम है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का भी सशक्त प्रयास है।