हाईकोर्ट सख्त: सेना-एयरफोर्स के पास अवैध निर्माण हटाने के निर्देश,
3 महीने में सर्वे जरूरी
राजस्थान हाईकोर्ट ने सैन्य ठिकानों के आसपास हो रहे अवैध निर्माण को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि एयरफोर्स और आर्मी के प्रतिबंधित क्षेत्रों में बिना एनओसी किए गए निर्माणों को हटाया जाए।
जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चन्द्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने स्थानीय प्रशासन को जोधपुर के पाबूपुरा क्षेत्र स्थित खसरा नंबर 632 और उससे जुड़े सभी हिस्सों का तीन महीने में विस्तृत सर्वे कराने के आदेश दिए हैं।
क्या है मामला?
यह मामला जनहित याचिकाओं के जरिए सामने आया, जिसमें आरोप लगाया गया कि रातानाडा एयरफोर्स स्टेशन और अन्य सैन्य ठिकानों के पास प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति निर्माण किए गए। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि स्थानीय प्रशासन ने रक्षा मंत्रालय की गाइडलाइन को नजरअंदाज कर निर्माण की मंजूरी दे दी।
केंद्र सरकार ने क्या कहा?
केंद्र की ओर से पेश पक्ष में बताया गया कि रक्षा प्रतिष्ठानों के आसपास निर्माण के लिए स्पष्ट नियम लागू हैं और एनओसी लेना अनिवार्य है। कुछ निर्माण इन नियमों के खिलाफ पाए गए हैं, जिन्हें हटाना जरूरी है।
कोर्ट के प्रमुख निर्देश
अदालत ने अपने आदेश में कई अहम निर्देश दिए—
- तीन महीने में पूरे क्षेत्र का विस्तृत सर्वे
- नियमों के खिलाफ पाए गए निर्माणों को हटाने की कार्रवाई
- गलत तरीके से दी गई अनुमति और लेआउट प्लान रद्द करना
- प्रतिबंधित क्षेत्र में हुए अतिक्रमण को हटाना
- भविष्य में एनओसी के बिना कोई निर्माण अनुमति नहीं देना
साथ ही अदालत ने स्थानीय निकायों को 3 अगस्त 2026 तक अनुपालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने साफ कहा कि सैन्य ठिकानों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।