OPS पर बढ़ेगा कितना बोझ? CAG ने सरकार से मांगा 10 साल का पूरा हिसाब

 OPS पर बढ़ेगा कितना बोझ? 

CAG ने सरकार से मांगा 10 साल का पूरा हिसाब



भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने राज्य सरकार से ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) के आर्थिक असर को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। CAG ने पूछा है कि अगले 10 वर्षों में OPS लागू रहने से सरकारी खजाने पर कितना अतिरिक्त भार पड़ेगा और इसका बजट पर क्या असर होगा।

रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तारीख 15 जून तय की गई है। CAG ने यह जानकारी एफआरबीएम एक्ट के प्रावधानों के तहत मांगी है, जिसके अनुसार सरकार को अपनी वित्तीय स्थिति से जुड़े सभी प्रमुख आंकड़े साझा करना अनिवार्य है।

OPS के साथ वित्तीय स्थिति पर नजर

राज्य में साल 2022 में पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू की गई थी। अब CAG यह जानना चाहता है कि इस फैसले से आने वाले वर्षों में राजकोषीय स्थिति पर कितना दबाव पड़ेगा और सरकार इसे कैसे संभालेगी।

छिपे कर्ज पर भी मांगा जवाब

CAG ने बजट से बाहर लिए गए कर्ज यानी “ऑफ बजट बोरोइंग” का पूरा ब्यौरा भी मांगा है। ये वे कर्ज होते हैं जो सरकारी कंपनियों, बोर्ड, निगम या अन्य संस्थाओं के जरिए लिए जाते हैं और सीधे बजट में नहीं दिखते। इससे असल कर्ज और घाटा कम नजर आता है।

योजनाओं का पैसा और खर्च का हिसाब

CAG ने सरकार से यह भी पूछा है कि योजनाओं के लिए जारी धन में से कितना पैसा खर्च हुआ और कितना अब भी खातों में पड़ा है। इसके अलावा—

  • अधूरे पड़े सरकारी कामों की सूची
  • सरकारी जमीनों की बिक्री और लीज का ब्यौरा
  • संपत्तियों की जियो-टैगिंग की स्थिति

जैसी जानकारियां भी मांगी गई हैं।

कैश ट्रांसफर और सब्सिडी पर भी नजर

लोकलुभावन योजनाओं में किए गए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और सब्सिडी का भी पूरा विवरण मांगा गया है। इसमें बिजली सब्सिडी, किसान योजनाएं और अन्य कैश ट्रांसफर स्कीम शामिल हैं—किसे कितना पैसा मिला, इसका योजनावार डेटा देना होगा।

पिछली बार अधूरी जानकारी पर नाराजगी

CAG ने अपनी चिट्ठी में साफ कहा है कि पिछले साल सरकार ने अधूरी और देरी से जानकारी भेजी थी। इस बार तय समय सीमा में पूरी और सही रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा।

आगे क्या होगा?

सरकार से जानकारी मिलने के बाद CAG विस्तृत ऑडिट करेगा। अगर किसी तरह की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो उसे अपनी वार्षिक रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा। यह रिपोर्ट विधानसभा में पेश होती है, जहां जनलेखा समिति (PAC) इसकी जांच कर आगे की कार्रवाई तय करती है।

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