जोधपुर में सुनने की जांच के लिए 8 महीने का इंतजार: एक मशीन पर हजारों मरीज, पेंशन-एडमिशन अटके
जोधपुर के मथुरादास माथुर हॉस्पिटल में बहरेपन और कम सुनने की जांच अब मरीजों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। हालात ऐसे हैं कि BERA टेस्ट के लिए मरीजों को सीधे 7 से 8 महीने बाद की तारीख दी जा रही है। एक ही मशीन और सिर्फ एक ऑपरेटर होने से रोजाना महज 3 से 4 मरीजों की जांच हो पा रही है, जबकि दूर-दराज जिलों से हर दिन 8-10 मरीज यहां पहुंच रहे हैं।
इस देरी का सबसे बड़ा असर बच्चों और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ रहा है। क्योंकि यही जांच रिपोर्ट विकलांगता पेंशन और स्कूल एडमिशन के लिए जरूरी होती है। समय पर जांच नहीं होने से कई बच्चों का भविष्य अधर में लटक रहा है।
बाड़मेर, जैसलमेर, पाली, जालोर जैसे जिलों से रेफर होकर आए मरीजों के परिजन परेशान हैं। बाड़मेर से आए एक दादा ने बताया कि उनके पोते की सुनने की जांच के लिए 8 महीने बाद की तारीख मिली है, जबकि स्थानीय स्तर पर यह सुविधा उपलब्ध ही नहीं है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि पूरे संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में सिर्फ एक मशीन होना बड़ी लापरवाही है। अगर तय तारीख पर मरीज नहीं पहुंच पाए, तो फिर से 7-8 महीने का इंतजार करना पड़ता है।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि BERA टेस्ट तकनीकी रूप से जटिल है और इसमें मरीज का सोना जरूरी होता है, जिससे प्रक्रिया धीमी हो जाती है। साथ ही प्रशिक्षित ऑडियोलॉजिस्ट की कमी भी बड़ी वजह है।
अब मरीजों और परिजनों की मांग है कि सरकार तुरंत स्पेशल कैंप लगाए और मशीन व स्टाफ बढ़ाए, ताकि 8 महीने की वेटिंग खत्म हो सके और बच्चों का भविष्य बचाया जा सके