🚨 जयपुर का हेल्थ सिस्टम ठप! SMS समेत
कई सरकारी अस्पतालों में सर्वर डाउन, मरीजों की लंबी कतारें
जयपुर। राजधानी जयपुर में गुरुवार को स्वास्थ्य व्यवस्था उस समय पटरी से उतर गई, जब प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाई मानसिंह (SMS) समेत कई अस्पतालों का सर्वर अचानक ठप हो गया। सर्वर बंद होते ही ओपीडी पर्ची, जांचों के बिल, भर्ती और डिस्चार्ज जैसी सभी जरूरी सेवाएं रुक गईं, जिससे अस्पतालों में अफरा-तफरी जैसे हालात बन गए।
मिली जानकारी के अनुसार, SMS हॉस्पिटल में दोपहर करीब 12:20 बजे सर्वर अचानक बंद हो गया, जो काफी देर तक चालू नहीं हो सका। इसके चलते रजिस्ट्रेशन काउंटरों पर मरीजों की लंबी-लंबी लाइनें लग गईं। लोग घंटों अपनी बारी का इंतजार करते रहे, वहीं बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ी। हालात ऐसे हो गए कि इलाज से ज्यादा समय लोगों का लाइन में ही निकल गया।
सर्वर ठप होने का असर सिर्फ SMS हॉस्पिटल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे जयपुर के सरकारी अस्पताल इसकी चपेट में आ गए। जे.के. लोन हॉस्पिटल, जनाना हॉस्पिटल (चांदपोल), सांगानेरी गेट महिला चिकित्सालय, जयपुरिया हॉस्पिटल, कांवटिया हॉस्पिटल और गणगौरी हॉस्पिटल समेत कई संस्थानों में भी यही स्थिति देखने को मिली। हर जगह रजिस्ट्रेशन, जांच और दवाइयों के काउंटर पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
दरअसल, इन सभी अस्पतालों में मरीजों से जुड़े लगभग सभी काम IHMS (Integrated Health Management System) सर्वर के जरिए होते हैं। इसी सिस्टम से ओपीडी पर्ची बनती है, जांचों के बिल तैयार होते हैं और मरीजों की भर्ती व डिस्चार्ज की प्रक्रिया पूरी होती है। ऐसे में जैसे ही सर्वर बंद हुआ, पूरा हेल्थ सिस्टम एक झटके में ठप पड़ गया।
हॉस्पिटल में काम करने वाले कर्मचारियों और कम्प्यूटर ऑपरेटरों के अनुसार, यह समस्या नई नहीं है। पिछले काफी समय से सर्वर में तकनीकी खराबी बनी हुई है। अक्सर हर एक-दो दिन में सर्वर स्लो हो जाता है और कई बार पूरी तरह बंद भी हो जाता है, जिससे मरीजों और स्टाफ दोनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
बताया जा रहा है कि यह सर्वर सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DOIT) के कंट्रोल में संचालित होता है। राज्य सरकार द्वारा IHMS पोर्टल के जरिए पूरे प्रदेश में एकीकृत डिजिटल हेल्थ सिस्टम विकसित करने की योजना है, लेकिन बार-बार सर्वर ठप होने की घटनाओं ने इस सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस घटना के बाद मरीजों और उनके परिजनों में भारी नाराजगी देखने को मिली। कई लोगों ने कहा कि घंटों लाइन में खड़े रहने के बावजूद काम नहीं हो पाया, वहीं गंभीर मरीजों को भी राहत नहीं मिल सकी।
❗ अब बड़ा सवाल
अगर राजधानी जयपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में ही इस तरह सिस्टम बार-बार फेल हो रहा है, तो आम मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज कैसे मिल पाएगा? क्या इस समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा या फिर मरीजों को आगे भी इसी तरह परेशान होना पड़ेगा?