जोधपुर में परंपरा और आस्था का
अद्भुत संगम, धींगा गवर मेले की रौनक शुरू
धींगा गवर मेला के आगमन के साथ जोधपुर एक बार फिर भक्ति और रंगों में सराबोर हो उठा है। शहर में पीढ़ियों से चली आ रही इस अनूठी परंपरा के तहत गवर माता की एक माह तक विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है, जिसमें स्थानीय परिवारों की गहरी आस्था झलकती है।
शनिश्चरजी का थान स्थित बख्तावरमल जी बाग में भंवरलाल मेवाड़ा के निवास पर इस बार भी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा का आयोजन किया गया। यहां रोजाना आरती, भजन-कीर्तन और विशेष भोग के जरिए गवर माता को प्रसन्न किया जा रहा है।
इस परंपरा की खास बात यह है कि इसमें बेटी के ससुराल जाने के बाद उसके मायके वाले प्रतीकात्मक रूप से उसकी पूजा करते हैं। लोक मान्यताओं के अनुसार गवर माता को बेटियों की रक्षक माना जाता है, जिससे यह परंपरा भावनात्मक रूप से भी बेहद खास बन जाती है।
परिवार की अनीता मेवाड़ा के अनुसार, इस बार माता के लिए खास तौर पर रंग-बिरंगी पोशाकें तैयार करवाई गई हैं। पूजा के दौरान घेवर, लड्डू और मेवे से बने पारंपरिक व्यंजनों का भोग लगाया जा रहा है, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है।
धींगा गवर मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह क्षेत्रीय पर्यटन को भी बढ़ावा देता है। हर साल की तरह इस बार भी दूर-दराज से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं और जोधपुर की समृद्ध लोक संस्कृति का अनुभव कर रहे हैं।
भंवरलाल मेवाड़ा परिवार द्वारा श्रद्धालुओं का स्वागत और प्रसाद वितरण किया जा रहा है। यह आयोजन एक बार फिर साबित करता है कि बदलते समय के बावजूद परंपराएं आज भी समाज को जोड़े रखने में अहम भूमिका निभा रही हैं