राजस्थान हाईकोर्ट की सख्ती: RAS अधिकारी को ट्रेनिंग के निर्देश, बिना कारण आदेश देना पड़ा भारी

 राजस्थान हाईकोर्ट की सख्ती: 

RAS अधिकारी को ट्रेनिंग के निर्देश, बिना कारण आदेश देना पड़ा भारी



जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए रोडवेज में पदस्थापित एक RAS अधिकारी को प्रक्रिया और कानूनी सिद्धांतों की विशेष ट्रेनिंग देने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि ट्रेनिंग पूरी होने तक अधिकारी को कर्मचारियों से जुड़े किसी भी प्रशासनिक कार्य से दूर रखा जाए।

यह आदेश न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने रोडवेज कर्मचारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

बिना कारण खारिज किया गया प्रतिनिधित्व

मामले में सामने आया कि धौलपुर डिपो के एक परिचालक को निलंबित किए जाने के बाद उसने कोर्ट के निर्देश पर अपना पक्ष रखा था। संबंधित अधिकारी ने कर्मचारी का प्रतिनिधित्व खारिज तो कर दिया, लेकिन इसके पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया।

अदालत ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को प्रभावित करने वाले निर्णय में कारण बताना अनिवार्य है। बिना कारण दिए आदेश पारित करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

प्रतिभा पलायन पर भी टिप्पणी

कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के फैसले संस्थानों में प्रतिभा के पलायन को बढ़ावा देते हैं, जो प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत है।

दोबारा होगी सुनवाई

अदालत ने संबंधित आदेश को निरस्त करते हुए रोडवेज प्रबंधन को निर्देश दिया कि कर्मचारी के मामले पर नए सिरे से, नियमों के अनुरूप निर्णय लिया जाए।

साथ ही कार्मिक विभाग को निर्देशित किया गया कि संबंधित RAS अधिकारी को विधिक प्रक्रिया, प्रशासनिक नियमों और निर्णय लेने की पारदर्शिता पर प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति न बने।

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