SI भर्ती विवाद: ट्रेनी सब इंस्पेक्टर्स ने दी नार्को टेस्ट’ की चुनौती, बोले—सच सामने आए तो नौकरी भी कुर्बान

SI भर्ती विवाद: ट्रेनी सब इंस्पेक्टर्स ने दी

नार्को टेस्ट’ की चुनौती, बोले—सच सामने आए तो नौकरी भी कुर्बान


जयपुर-राजस्थान की चर्चित SI भर्ती-2021 को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। अब इस भर्ती में चयनित ट्रेनी सब इंस्पेक्टर्स ने सरकार के सामने एक बड़ा प्रस्ताव रख दिया है। उनका कहना है कि वे अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए नार्को एनालिसिस और पॉलीग्राफ जैसे वैज्ञानिक परीक्षण कराने को तैयार हैं—even अगर इसमें वे असफल होते हैं, तो उन्हें तुरंत नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाए।

ट्रेनी एसआई के परिजनों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को शपथ पत्र भेजकर यह सहमति दी है। इसमें कहा गया है कि उनके बच्चे स्वेच्छा से ये टेस्ट कराने को तैयार हैं और इनके परिणाम को अंतिम साक्ष्य माना जाए।

अफसरों पर लगाए गंभीर आरोप

अभ्यर्थियों ने जांच एजेंसी के कुछ अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि वे उन्हें जानबूझकर फंसा रहे हैं। उनका कहना है कि कोर्ट में भ्रामक रिपोर्ट पेश कर सच्चाई को दबाने की कोशिश की जा रही है, जिससे निर्दोष अभ्यर्थियों को नुकसान हो रहा है।

“750 परिवारों पर मंडरा रहा संकट”

शपथ पत्र में कहा गया है कि भर्ती रद्द होने से 750 से ज्यादा परिवारों का भविष्य खतरे में है। अभ्यर्थियों ने इसे सामूहिक सजा बताते हुए सरकार से अपील की है कि इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए।

सरकार के रुख पर भी सवाल

अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार पहले “सेग्रीगेशन (दोषियों को अलग करना)” संभव मान चुकी है, लेकिन कोर्ट में अलग रुख पेश किया गया। इससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई है।

हाईकोर्ट पहले ही कर चुका है भर्ती रद्द

गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 28 अगस्त 2025 को पेपर लीक और अनियमितताओं के चलते इस भर्ती को रद्द कर दिया था। बाद में 4 अप्रैल को खंडपीठ ने भी इस फैसले को बरकरार रखा, जिससे भर्ती रद्द रहने का रास्ता साफ हो गया।

सुप्रीम कोर्ट जाने की मांग

अभ्यर्थियों और उनके परिवारों ने सरकार से मांग की है कि वह सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी करे और यह साबित करे कि दोषियों और निर्दोषों को अलग करना संभव है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और अदालत आगे क्या रुख अपनाते हैं

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